poems 21 March 2015 2 min read 6

चादर

ङार कलावै भरने पौंदे। ठार सिआले ठरने पौंदे। अपना ढंडा आपूं फूकी , जालो खाले जरने पौंदे। जीन दुहारा मूंढै चुक्की सौ सौ मरने करने पौंदे। मुंडी झिगड़ी करनी पौंदी मत्थे पैरें धरने पौंदे। चादर जिस'ले लौहकी…

Susheel Begana

Susheel Begana

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चादर
   

ङार कलावै भरने पौंदे। ठार सिआले ठरने पौंदे। अपना ढंडा आपूं फूकी  , जालो खाले जरने पौंदे। जीन दुहारा मूंढै चुक्की सौ सौ मरने करने पौंदे। मुंडी झिगड़ी करनी पौंदी मत्थे पैरें धरने पौंदे। चादर जिस'ले लौहकी पेई जा गोडे नेड़े करने पौंदे।

बेकदरें ने लाना पौंदी। लाइयै तोड़ नभाना पौंदी। तलियें उप्पर मेखां खोबी सूली जिंद टंङाना पौंदी। बत्तर इत्थें मगरा पौंदा पैहलें जान सकाना पौंदी। ढाकै उप्पर बलदे सूरज उसदी सारें सरने पौंदे। al)चादर जिस'ले लौहकी पेई जा गोडे नेड़े करने पौंदे।

अंदर तीली लाना पौंदी। लाइयै होर भखाना पौंदी। अपनी मैं दी कुन्नी चाढ़ी खासा चिर गड़काना पौंदी। मुगती करियै हीखी अड़ेआ थोड़ी ने सरचाना पौंदी। राह्इयै अंदर मासा मासा रत्ती रत्ती चरने पौंदे। चादर जिस'ले लौहकी पेई जा गोडे नेड़े करने पौंदे।

एह्की सूरत भुलाना पौंदी। बुद्धि मिरग बनाना पौंदी। जेह्की चीज़ गुआचै बेह्ड़ै अपने अंदर पाना पौंदी। ओह्की उम्र बद्दाने गित्तै एह्की उम्र मुकाना पौंदी। सौ सौ जीवन जीने पौंदे सौ सौ जीवन मरने पौंदे। चादर जिस'ले लौहकी पेई जा गोडे नेड़े करने पौंदे।

बडलै चरखी डाह्ना पौंदी। तंदें जिंद कताना पौंदी। इत्थें बेहियां नेईंयूं खंदे सजरी रोज़ पकाना पौंदी। जेह्की गंदल इत्थें पकदी तलियें उप्पर राह्ना पौंदी। गास बगान्ना नैनें भरियै फुंग्गें फुंग्गें ब'रने पौंदे। चादर जिस'ले लौहकी पेई जा गोडे नेड़े करने पौंदे।

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