poems 7 February 2026 1 min read 4

कविता

पीड़ां स'लचै सुखें 'नै रलचै कुस शा खिंडचै कुस'नै रलचै की नेईं हलचै की नेईं चलचै सीसां लैचै सीसें फलचै ऐवें की अस सड़चै-बलचै प्हाड़ी बत्ता किंजो चलचै जद तक जीन ऐ चढ़चै-ढलचै कदुऐं तीकर पित्ता तलचै हा…

Nirmal Vinod

Nirmal Vinod

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पीड़ां स'लचै 
सुखें 'नै रलचै 

कुस शा खिंडचै 
कुस'नै रलचै 

की नेईं हलचै 
की नेईं चलचै 

सीसां लैचै 
सीसें फलचै 

ऐवें की अस 
सड़चै-बलचै 

प्हाड़ी बत्ता 
किंजो चलचै  

जद तक जीन ऐ
चढ़चै-ढलचै 

कदुऐं तीकर 
पित्ता तलचै 

हा 'नै कुसै दी 
की अस गलचै 

होली पर रंग 
की नेईं मलचै 

ओह् ऐ धमूड़ी 
केह्ड़ा पलचै 

अस गलेशियर 
सेकैं गलचै 

स'ञ घिरै दी 
चीजां स'लचै 

उसदी दुआठन 
की नेईं मलचै 

नुक्कां फंडो 
'निर्मल' चलचै 
———————-
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